कमर्शियल रियल एस्टेट में निवेश से पहले जान लें ये जरूरी बातें, तभी मिलेगा अच्छा रिटर्न

भारतीय अर्थव्यवस्था के पटरी से उतरने के बाद से हर सेक्टर की स्थिती खराब बताई जा रही है. मंदी के इस दलदल में एक-एक कर कई सेक्टर धंसते जा रहे हैं. इस सूची में रियल एस्टेट भी है. माना जा रहा है कि रियल एस्टेट की स्थिती इस समय सबसे खराब है. इस सेक्टर की कम से कम 6 कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है. एक समय था जब हर किसी को इस सेक्टर से जुड़ने की चाह थी, लेकिन समय और स्थिती ने सब बदल दिया.

ऐसा नहीं है कि हर किसी का मन बदल गया हो, कई लोग अभी भी ऐसे हैं जो इस सेक्टर में निवेश करने की तैयारी में हैं या यूं कहें कई समय से इसका इंतजार कर रहे हैं. निवेश के लिए रियल एस्टेट भारतीयों का पसंदीदा विकल्प रहा है. लेकिन जानकारी की कमी के कारण आधे से ज्यादा लोग ऐसा रिस्क उठाने में हिचकिचाते हैं. इसी हिचकिचाहट को दूर करने के लिए Property Bharat ने आपकी मदद करने का फैसला किया है.

जब बात कमर्शियल रियल एस्टेट की हो तो निवेश के दौरान ज्यादा सावधानी बरतें. इसके लिए Property Bharat आपको कुछ जानकारी देगा, जिनका ध्यान आपको रखना चाहिए.

जगह

जैसे घर में घुसने के लिए सबसे पहले दरवाजे की जरूरत होती है ऐसे ही निवेश के लिए आपको सबसे पहले जगह यानी लोकेशन का चयन करना होगा. कमर्शियल प्रॉपर्टी के कमाई के दो तरीके हैं- पहला किराया और दूसरा पूंजी में वृद्धि. ये दोनों चीजें लोकेशन पर निर्भर करती हैं. इसलिए निवेश करो तो ऐसी लोकेशन पर ही करें जहां वेकेंसी 5 फीसदी से कम हो. इससे आपूर्ति पर लगाम लगी रहेगी, किरायेदारों के खाली करने की गुंजाईश कम होगी और किराया/कीमत बढ़ती रहेगी.

गुणवत्ता

लोकेशन के बाद दूसरी सबसे बड़ी चीज है Quality. आपने ऐसे कई उदाहरण देखे होंगे जहां एक लोकेशन पर दो बिल्डिंग होने पर भी एक की मांग तेज और दूसरे की धीमी रह जाती है. इसकी वजह कंस्ट्रक्शन की क्वालिटी है. इसलिए अगर निवेश में रिटर्न अधिक पाना हो तो Quality का भरपूर ध्यान रखना होगा.

किरायेदारों की क्वालिटी

एक अच्छा किरायेदार कमर्शियल प्रॉपर्टी की वैल्यू में खासा इजाफा कर देता है. बहुराष्ट्रीय कंपनी से किराये की बात करें और छोटे-मोटे लोगों से परहेज करें. अच्छा किरायेदार समय पर किराया देगा, लंबे समय तक रहेगा और प्रॉपर्टी की वैल्यू बढ़ाने में मदद करेगा.

इंटीरियर फिटिंग्स

एक निवेशक के रूप में आपको प्रॉपर्टी की इंटीरियर फिटिंग के बारे में बात करने की जरूरत है. कुछ किरायेदार खुद यह सब करते हैं तो कुछ बिल्डर से यह सब कराने को कहते हैं. अगर आप इसका हिसाब लगायें तो यह प्रति वर्ग फीट करीब 800-1000 रुपये तक बैठता है. डेवलपर इसके लिए किराये के रूप में 25-30 रुपये प्रति वर्ग फीट हर महीने चार्ज कर सकता है. जो किरायेदार यह सब खुद कराता है उसके लंबे समय तक इसमें बने रहने की उम्मीद होती है.

लीज स्ट्रक्चर

कमर्शियल लीज स्ट्रक्चर रेजिडेंशियल से बिकुल अलग होता है. आम तौर पर इसका स्ट्रक्चर 3+3+3 या 5+5+5 साल का होता है. इसे फिर से तीन या पांच साल के लिए आगे बढ़ाया जाता है. ये कई बार एकतरफा भी होते हैं. जब जमीन का मालिक उसे खाली करने को बोलेगा तो बिल्डिंग खाली करनी पड़ेगी. इसमें हालाँकि एक लॉक-इन पीरियड भी होता है, जिसमें आप तीन साल तक खाली नहीं कर सकते.

सिक्योरिटी डिपाजिट

कमर्शियल प्रॉपर्टी में आम तौर पर किराये का 10-12 गुना सिक्योरिटी डिपाजिट देना होता है. अगर कोई आपसे 6 महीने की सिक्योरिटी की बात करता है तो इसका मतलब है कि उसका नजरिया छोटी अवधि का ही है. यह भी हो सकता है कि उसे नकदी की दिक्कत हो. स्टार्ट अप आम तौर पर इस तरह के कम समय के कॉन्ट्रेक्ट करते हैं.

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