लो आ गए रियल एस्टेट के अच्छे दिन ! बढ़ रही है प्रॉपर्टी की डिमांड

देर से ही सही लेकिन घर खरीदने की चाहत रखने वाले अब अपने सपने को पूरा करने में लगे हैं। GST दामों में कमी और लोन की ब्याज दरें कम होने की वजह से घर खरीदने की चाहत रखने वाले लोग धीरे-धीरे रियल्टी मार्केट का रूख करने में लगे हैं। रियल एस्टेट के जानकारों की मानें तो नए प्रॉजेक्ट्स की लॉन्चिंग कम और खरीददार लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे बाजार को सामान्य स्तर की ओर वापसी करने में मदद मिल रही है।

आपको बता दे कि देश के टॉप सात शहरों में बिना बिके रेजिडेंशल अपार्टमेंट्स की इनवेंटरी मार्च तिमाही के अंत में घटकर 30 महीनों पर आ गई थी। 2017 में इसी तिमाही में इसका स्तर 50 महीनों का था। जानकारों का कहना है कि यह पैमाना बताता है कि बचा हुआ स्टॉक बेचने में कितने महीने लग सकते हैं। आमतौर पर 18 महीनों का स्तर अच्छा माना जाता है।

इन शहरों में बिना बिके मकानों का स्टॉक पिछले दो वर्षों में करीब 16 प्रतिशत घटकर 665,000 यूनिट्स पर आ गया। हालांकि यह 2013 में 496,000 यूनिट्स के सबसे निचले स्तर से अभी काफी ज्यादा है। 2014 से इनवेंटरी बढ़ने का ट्रेंड हालांकि थमा है और आंकड़े इसमें तिमाही दर तिमाही आधार पर गिरावट की जानकारी दे रहे हैं।

रेट में बढ़ोतरी नहीं होने की वजह से बढ़ रही है सेल

इकॉनोमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के चेयरमैन का कहना है कि विभिन्न शहरों में ऐवरेज प्रॉपर्टी प्राइस मोटे तौर पर जस का तस बना हुआ है और पिछले दो वर्षों में इसमें 2 प्रतिशत से भी कम इजाफा हुआ है।

2017 के पहले क्वॉर्टर में ऐवरेज प्राइस 5480 रुपये प्रति वर्ग फुट था, जो 2019 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में 5570 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गया। उनका कहना है कि केंद्र में स्टेबल गवर्नमेंट से बायर्स का हौसला और बढ़ने की उम्मीद है। आने वाली तिमाहियों में हाउसिंग सेल्स बढ़ सकती है। मार्च तिमाही में टॉप सात शहरों में हाउसिंग सेल्स 71 प्रतिशत बढ़कर 78520 यूनिट्स पर पहुंच गई, जो दो साल पहले की इसी अवधि में 46000 यूनिट्स पर थी.

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