होम लोन: घर खरीदने के सपने को पूरा करने के लिए रखें इन बातों का ध्यान

काश मेरे पास भी घर होता ! ये अब ना सिर्फ लोगों का सपना है बल्कि इच्छा सी हो चली है. प्रॉपर्टी की कीमत भले ही आसमान क्यों ना छूं रही हो, लेकिन लोगों की इच्छा भी उसी पर अड़ी है कि चाहे कुछ भी हो जाए लेकिन घर तो लेकर रहेंगे. ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि इंडेक्स सर्वे के एक एडिशन में इस बात का खुलासा हुआ है.

इस इंडेक्स के आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं. इस इंडेक्स पर एक घर खरीदने के लक्ष्य का स्कोर 92.1 था. 22 से 27 साल के लोगों (अर्ली जॉबर्स) के लिए यह एस्पिरेशन स्कोर 90.8 था, 28 से 34 साल के लोगों (मनीमूनर्स) के लिए 92.5 और 35 से 45 साल के लोगों (वेल्थ वारियर्स) के लिए इस लक्ष्य का स्कोर 93.1 था.

ये तो सब जानते हैं कि एक घर खरीदने के लिए काफी खोजबीन, डॉक्यूमेंटेशन, फाइनेंशियल प्लानिंग और घर खरीदने के लिए एक फंड तैयार करने की जरूरत पड़ती है जो कि अक्सर एक व्यक्ति की जिंदगी भर की सेविंग्स होती है. कई घर खरीदारों के लिए, एक बड़ी रकम का इंतजाम करना मुश्किल है और इस इच्छा को पूरा करने में शायद यह सबसे बड़ी रुकावट भी साबित होती है. ऐसे समय में ‘मसीहा’ के तौर पर होम लोन ही काम आता है. लेकिन, घर लेने में जितनी टेंशन नहीं होती उससे कई ज्यादा सिर दर्दी पूरी प्रक्रिया की प्लानिंग के दौरान होती है. एक होम लोन के लिए अप्लाई करने से पहले, एक व्यक्ति को लोन (जिसे आम भाषा में उधार कहते हैं ) लेने से जुड़ी कुछ जरूरी बातों के बारे में जान लेना चाहिए, क्योंकि एक छोटी-सी भी गलती आपके फाइनेंस को काफी नुकसान पहुंचा सकती है.

एक घर लेना अलग बात होती है और एक घर के लिए लोन लेना अलग बात है. आसान शब्दों में जानना हो तो ये समझ जाइए की एक साधारण परिवार के जीवन भर की कमाई एक घर लेने में लग जाती है. लेकिन आज आपको Property Bharat कुछ अहम जानकारियां देगा जो आपके लिए हमेशा काम आएगी. ये जानकारी घर खरीदने से पहले और घर खरीदने के बाद तक जुड़ी है, इस जानकारी में लोन कैसे और कहां से लें इस बात का भी जिक्र किया गया है.

बैंक से सिर्फ 80 प्रतिशत ही मिल पाता है लोन

  • आप कितना उधार ले सकते हैं? यहां इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि उधारदाता आम तौर पर प्रॉपर्टी कॉस्ट का लगभग 80% ही फाइनेंस करते हैं. प्रॉपर्टी कॉस्ट का बाकी का 20%, डाउन पेमेंट करना पड़ता है जिसका इंतजाम आपको प्रॉपर्टी की कीमत का पता लगने के बाद करना पड़ता है.
  • इसके अलावा, आप घर की खरीदारी से जुड़े अन्य खर्च जैसे रजिस्ट्रेशन, स्टाम्प ड्यूटी, फर्निशिंग, ब्रोकरेज, मूविंग और अन्य तरह-तरह के खर्च के लिए अलग से 10% अमाउंट का भी इंतजाम करना पड़ सकता है. आप जो पैसे उधार लेते हैं वह आपके मौजूदा डिस्पोजेबल इनकम से भी जुड़ा होता है.
  • एक सह-उधारकर्ता (जैसे एक कमाऊ पति/पत्नी) आपकी लोन एलिजिबिलिटी को बढ़ाने में मदद कर सकता/सकती है क्योंकि उधारदाता, आप दोनों के इनकम पर विचार करते हुए एक बड़ा लोन सैंक्शन कर सकता है.

क्या आप होम लोन लेने के पात्र हैं?

आपके इनकम के अलावा, उधारदाता आपको उधार देने से पहले आपके क्रेडिट स्कोर का भी मूल्यांकन करेगा. एक क्रेडिट स्कोर की मदद से एक व्यक्ति के क्रेडिट इतिहास के माध्यम से उसकी क्रेडिबिलिटी का पता चलता है. इसलिए, एक लोन के लिए अप्लाई करने से पहले अपने क्रेडिट स्कोर की जांच कर लेनी चाहिए और यह देख लेना चाहिए कि आपका स्कोर 750 या उससे अधिक है या नहीं. यदि ऐसा नहीं है तो अपने मौजूदा लोन या क्रेडिट कार्ड कर्ज का समय पर रीपेमेंट करके अपने क्रेडिट स्कोर को बेहतर बनाने का काम शुरू कर दें.

ब्याज दरों की तुलना करना जरूरी है

एक होम लोन लेने का फैसला कर लेने के बाद, आपको अलग-अलग बैंकों और उधारदाताओं द्वारा ऑफर किए जाने वाले इंटरेस्ट रेट्स की तुलना कर लेनी चाहिए. याद रखें, आपको हर महीने अपने उधारदाता को जो इक्वेटेड मंथली इंस्टालमेंट (EMI) देना पड़ेगा उसमें लोन अमाउंट के साथ-साथ बाकी के लोन अमाउंट पर लगने वाला इंटरेस्ट भी शामिल होगा.

इसे समझते समय, अन्य चार्ज जैसे प्रोसेसिंग फीस, लेट फीस पेनाल्टी, इत्यादि पर भी विचार करें. क्योंकि एक होम लोन एक लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल कमिटमेंट है, इसलिए मार्जिनल कॉस्ट ऑफ़ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) और रेपो रेट लिंक्ड रेट्स दोनों को अच्छी तरह समझने की कोशिश करें.

कितने समय(सालों) तक लें लोन ?

  • अपने लोन के कार्यकाल को समझना बहुत जरूरी है क्योंकि आपकी EMI पर इसका बहुत असर पड़ता है. लोन के कार्यकाल का निर्धारण, उधारकर्ता की उम्र को ध्यान में रखकर किया जाता है. एक उधारकर्ता, अपने मौजूदा इनकम, इनकम बढ़ने की उम्मीद, बचे हुए कामकाजी सालों की संख्या के आधार पर अपने लोन के कार्यकाल का पता लगा सकता है. आम तौर पर, एक होम लोन, ज्यादा से ज्यादा 30 साल के लिए सैंक्शन किया जाता है.
  • कार्यकाल जितना ज्यादा लम्बा होता है, EMI उतनी कम होती है; कार्यकाल जितना छोटा होता है, EMI उतनी बड़ी होती है. लेकिन, EMI कम होने पर लोन के कार्यकाल के दौरान इंटरेस्ट का बोझ ज्यादा होता है. इन बातों को ध्यान में रखते हुए ही कोई फैसला लें. वही ऑप्शन चुनें जो आपके लिए आरामदायक हो. आम तौर पर, आपकी सभी EMI का टोटल अमाउंट, आपके डिस्पोजेबल इनकम के 40% से ज्यादा नहीं होना चाहिए.

होम लोन के साथ इंश्योरेंस लेंगे तो फायदे में रहेंगे

होम लोन लेते समय आपके पास कई ऐसे एजेंट का फोन आएगा जो आपको इंश्योरेंस खरीदने की सलाह देगा. सलाह तक तो ठीक है, लेकिन किस कंपनी से कैसा इंश्योरेंस खरीदना है ये आप पर निर्भर करता है. क्योंकि इंश्योरेंस लेना भले ही आपको बोझ जैसा लगे लेकिन भविष्य में कुछ अनहोनी के दौरान मुसीबत से आपको यही इंश्योरेंस प्लान निकाल सकता है. दुर्भाग्य से उधारकर्ता की मौत होने पर लोन अमाउंट को कवर करने के लिए लोन लेने के बाद एक टर्म इंश्योरेंस खरीदना भी ठीक रहेगा. वैसे बाजार में इंश्योरेंस के लिए कई कंपनियां बैठी हैं, लेकिन आखिरी फैसला आपका ही होगा कि आपको कैसा इंश्योरेंस प्लान चाहिए.

सारे दस्तावेज तैयार रखें

एक होम लोन के लिए अप्लाई करते समय, एग्रीमेंट से जुड़े सभी नियमों एवं शर्तों पर ध्यान दें. इसके अलावा, सारे जरूरी दस्तावेज जैसे प्रॉपर्टी के कागजात, सैलरी स्लिप्स, पिछले तीन साल का इनकम टैक्स रिटर्न (ITR), आइडेंटिटी और एड्रेस प्रूफ, टाइटल डीड्स, इत्यादि तैयार रखें.

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